नई दिल्ली। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की निर्णायक जीत पर बधाई देते हुए कहा कि भारत हमेशा लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर गहरे भरोसे को दर्शाती है।
भारत ने रिश्ते मजबूत करने की जताई इच्छा
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि वह दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए नए नेतृत्व के साथ काम करने को उत्सुक हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय कूटनीति में नई संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज है।
रिश्तों में सुधार की उम्मीद क्यों बढ़ी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संवाद के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीमारी के दौरान चिंता जताई थी और उनके निधन पर शोक भी व्यक्त किया था। इसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सौहार्द का संकेत माना गया था।
कैसे बिगड़े थे भारत-बांग्लादेश संबंध
अगस्त 2024 से पहले तक शेख हसीना के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध बेहद मजबूत माने जाते थे। लेकिन जुलाई-अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद 5 अगस्त को उनकी सत्ता से विदाई हुई और उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद देश की अंतरिम सत्ता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में आई, जिसके दौरान द्विपक्षीय रिश्तों में ठंडापन देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि अब बीएनपी की सत्ता में वापसी के बाद लगभग दो दशकों बाद नई राजनीतिक परिस्थितियाँ दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर ला सकती हैं।
कूटनीतिक नजरिया: आगे क्या संकेत
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की त्वरित बधाई संदेश कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। इससे साफ संकेत मिलता है कि नई सरकार के साथ भारत सहयोग और स्थिरता की नीति पर आगे बढ़ना चाहता है। दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
